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लेखनी प्रतियोगिता -19-Jul-2022

‘शेष गीत तू गा जाना’ गीत संग्रह से 

 मेरा जीवन: मेरा संघर्ष

वक्त तेरे कुटिल-कर ये ,
रोक न पायेंगे पथ मेरे ।

तकलीफों की तंग गलियों से, 
दुख से गुजरे है रथ मेरे ।।

जननी को जब खोया था यूं,
बहुत दिनों तक रोया था यूं ।

आंखों ओझल अपने सपने,
बहुत दिनों ना सोया था यूं ।।

तब थे दिन निष्ठुर बेगाने, 
अश्रु से लथपथ कथ मेरे ।

तकलीफों की तंग गलियों से,
दुख से गुजरे है रथ मेरे ।।

ना थमें थे हौसले ये ,
विकट बुरे हालात में भी ।

सिर से जब साया उठा था,
स्याह काली रात में भी ।।

अब क्या रोकेंगे सुख के दिन ,
मंजिल को बढ़ते पद मेरे ।

तकलीफों की तंग गलियों से,
दुःख से गुजरे है रथ मेरे ।।

जीवन क्या संघर्ष सरल था,
जब जीवन पदचाप नहीं थी ।

शब्द नहीं कुछ कह पाऊं मैं,
अमन दर्द की माप नहीं थी ।।

अब बाजू में दम का आकर,
हिम्मत से कर है बद्ध मेरे ।

तकलीफों की तंग गलियों से,
दुःख से गुजरे है रथ मेरे ।।

मुकेश बोहरा अमन
गीतकार
बाड़मेर राजस्थान
8104123345



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7 Comments

Seema Priyadarshini sahay

20-Jul-2022 06:12 PM

बेहतरीन रचना

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Gunjan Kamal

20-Jul-2022 09:53 AM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻

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Raziya bano

20-Jul-2022 08:48 AM

Bahut sundar rachna

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